सन्दर्भ:
: हाल ही में यह देखा गया है कि श्रीकाकुलम जिले में पाथारा प्रथा (Paathara Practice) या खोनी नाम की अनाज भंडारण की प्राचीन परंपरा तेज़ी से खत्म हो रही है।
पाथरा प्रथा के बारे में:
- यह अनाज को ज़मीन के नीचे स्टोर करने की एक पुरानी प्रथा है।
- भंडारण के गड्ढे में ताज़ा काटा हुआ अनाज, ज़्यादातर धान, स्टोर किया जाता है।
- यह आंध्र प्रदेश-ओडिशा सीमा के पास, श्रीकाकुलम ज़िले के उद्दनम क्षेत्र में महेंद्रतनया नदी के किनारे रहने वाले किसानों द्वारा किया जाता है।
- यह परंपरा अंदरूनी, पहाड़ी इलाकों में फली-फूली, जहाँ ज़मीन के नीचे अनाज का भंडारण प्रभावी था।
- पाथरा प्रथा की मुख्य विशेषताएं:
- संरचना: गड्ढा आयताकार आकार में खोदा जाता है, जिस पर पुआल और मिट्टी का प्लास्टर किया जाता है, और ऊपर से गोबर की एक परत से सील किया जाता है।
- पाथरा फूस के घरों के सामने बनाया जाता था और ग्रामीण वास्तुकला का एक अभिन्न अंग था, जो एक समृद्ध संयुक्त परिवार प्रणाली का प्रतीक था।
- धान उगाने वाला हर परिवार अपनी सालाना ज़रूरतों के लिए पर्याप्त अनाज स्टोर करता था।
- फायदा: पाथरा अनाज को चूहों, मिलावट और चोरी से बचाता है।
- गिरावट: जगह की कमी और जागरूकता की कमी, साथ ही ग्रामीण वास्तुकला में बदलाव ने इसके पतन में योगदान दिया है।
