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जैवलिन मिसाइलजैवलिन मिसाइल
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सन्दर्भ:

: U.S. स्टेट डिपार्टमेंट ने हाल ही में भारत को जैवलिन मिसाइल (Javelin Missile) और एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल और उनसे जुड़े इक्विपमेंट की संभावित बिक्री को मंज़ूरी दी है, जिसकी अनुमानित कुल कीमत $92.8 मिलियन है।

जैवलिन मिसाइल के बारे में:

  • यह अमेरिका में बनी, पोर्टेबल, एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल है।
  • इसे अमेरिका की बड़ी डिफेंस कंपनियों रेथियॉन और लॉकहीड मार्टिन ने मिलकर डेवलप और प्रोड्यूस किया है।
  • इसे मेन बैटल टैंक और हल्के रंग की मिलिट्री गाड़ियों जैसे भारी आर्मर्ड गाड़ियों को हराने के लिए डिज़ाइन किया गया था।
  • इस हथियार में किलेबंदी, बंकर और हेलीकॉप्टर जैसे दूसरे टारगेट टाइप के खिलाफ भी कैपेबिलिटी है।
  • यह पहली बार 1996 में U.S. मिलिट्री में सर्विस में आया था।
  • इसकी प्रमुख विशेषताएं:
    • इसकी इफेक्टिव रेंज 2.5 km है, और नए मॉडल कथित तौर पर 4 किलोमीटर तक पहुंचने में कैपेबल हैं।
    • वज़न: 5.11 kg
    • इसके सॉफ्ट-लॉन्च मैकेनिज्म की वजह से इसे छोटी जगहों से भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
    • यह बाहरी कमांड या टारगेट डेज़िग्नेशन के बिना खुद को टारगेट तक गाइड करने के लिए “फायर-एंड-फॉरगेट” टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है।
    • इसका इमेजिंग-इंफ्रारेड सीकर एक बार फायर होने पर इंडिपेंडेंट होमिंग को इनेबल करता है, जिससे ऑपरेटर तुरंत कवर ले सकते हैं। यह मिसाइल डायरेक्ट या टॉप-अटैक मोड का इस्तेमाल करके टारगेट पर हमला कर सकती है, जिसमें टॉप-अटैक मोड टैंक के ऊपर पतले आर्मर की कमज़ोरियों का फ़ायदा उठाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
    • इसका टैंडम हाई-एक्सप्लोसिव एंटी-टैंक (HEAT) वॉरहेड एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर को हराने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो आजकल के मेन बैटल टैंक पर आम होता जा रहा है।

एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल के बारे में:

  • यह एक GPS-गाइडेड आर्टिलरी शेल है जिसे हॉवित्जर जैसी बड़ी तोपों से फायर किया जाता है।
  • इसे U.S. आर्मी रिसर्च लेबोरेटरी (ARL) और यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी आर्मामेंट रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इंजीनियरिंग सेंटर (ARDEC) के बीच मिलकर बनाया गया था।
  • भारत पहले से ही अपनी M-777 हॉवित्जर तोपों में एक्सकैलिबर आर्टिलरी एम्युनिशन का इस्तेमाल करता है।
  • एक्सकैलिबर मुश्किल इलाकों में भी पारंपरिक आर्टिलरी की पहुंच से बाहर के टारगेट को भेदने में सक्षम हैं।
  • वे टारगेट के दो मीटर के अंदर “रेंज की परवाह किए बिना” हमला करने में सक्षम हैं।
  • यह वेपन सिस्टम 39-कैलिबर आर्टिलरी की पहुंच को 40 किलोमीटर, 52-कैलिबर आर्टिलरी की पहुंच को 50 किलोमीटर और 58-कैलिबर आर्टिलरी की पहुंच को 70 किलोमीटर तक बढ़ाता है।
  • इस एक्यूरेसी फैक्टर की वजह से गाइडेड शेल बहुत कम या बिल्कुल भी कोलेटरल डैमेज नहीं कर पाते हैं।

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By gkvidya

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