सन्दर्भ:
: संसद की लोक लेखा समिति ने GSAT-18 संचार उपग्रह के प्रक्षेपण पर 17.27 करोड़ रुपये के अनावश्यक व्यय पर “निराशा” व्यक्त की है।
GSAT-18 उपग्रह के बारें में:
: GSAT-18 एक संचार उपग्रह है जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 5 अक्टूबर, 2016 को प्रक्षेपित किया था।
: प्रक्षेपण वाहन- फ्रेंच गुयाना के कौरौ से हैवी-ड्यूटी एरियन-5 VA-231 रॉकेट।
: इसका वजन- लिफ्टऑफ के समय 3,404 किलोग्राम।
: मिशन जीवनकाल- 15 साल (2032 तक)।
: कक्षा- जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में इंजेक्ट किया गया।
: उपग्रह का नियंत्रण- कर्नाटक के हसन में ISRO की मास्टर कंट्रोल फैसिलिटी (MCF) द्वारा प्रबंधित।
: ज्ञात हो कि लोक लेखा समिति (पीएसी) ने 2027 तक छह ट्रांसपोंडरों के कम उपयोग के कारण GSAT-18 की आर्थिक व्यवहार्यता पर चिंता जताई है।
: समिति ने सिफारिश की है कि अंतरिक्ष विभाग को सार्वजनिक धन से जुड़ी उपग्रह परियोजनाओं की योजना बनाने में अधिक वित्तीय विवेक का प्रयोग करना चाहिए।
: रिपोर्ट में निष्क्रिय ट्रांसपोंडरों के कारण ₹117 करोड़ के राजस्व नुकसान पर प्रकाश डाला गया है।
GSAT-18 की मुख्य विशेषताएं:
: ट्रांसपोंडर- अपर एक्सटेंडेड सी-बैंड, नॉर्मल सी-बैंड और कू-बैंड में 48 संचार ट्रांसपोंडर
: सेवाएँ- टेलीविज़न, दूरसंचार, वीसैट और डिजिटल उपग्रह समाचार एकत्रीकरण प्रदान करता है
: बेड़े में वृद्धि- यह इसरो के 14 दूरसंचार उपग्रहों के परिचालन बेड़े को मजबूत करता है
: बैकअप भूमिका- यह पुराने उपग्रहों को प्रतिस्थापित करके संचार सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करता है।
