सन्दर्भ:
: भारतीय नौसेना ने आधिकारिक तौर पर सर्वे वेसल ‘संशोधक’ (यार्ड 3028) को प्राप्त कर लिया है, जो ‘सर्वे वेसल (लार्ज)’ परियोजना का चौथा और अंतिम पोत है।
सर्वे वेसल ‘संशोधक’ के बारें में:
- ‘संशोधक’ चार ‘सर्वे वेसल (लार्ज)’ (SVL) श्रेणी के जहाजों में से अंतिम जहाज है, जिसे भारतीय नौसेना के ‘वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो’ द्वारा संचालित किया जाता है।
- ‘संशोधक’ नाम का अर्थ है ‘शोधकर्ता’, जो डेटा-संग्रह मंच के रूप में जहाज की प्राथमिक भूमिका को दर्शाता है।
- यह अपने सहयोगी जहाजों- INS संधायक, INS निर्देशक और INS ईक्षक के बाद आया है, और अक्टूबर 2018 में शुरू की गई स्वदेशी परियोजना को पूरा करता है।
- किसने विकसित किया:
- इसे कोलकाता स्थित ‘गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स’ (GRSE) द्वारा डिज़ाइन और निर्मित किया गया है।
- इस जहाज में लागत के हिसाब से 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसमें बड़ी संख्या में भारतीय उद्योग और MSME शामिल हैं।
- इसका उद्देश्य:
- SVL प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य मौजूदा ‘संधायक’ श्रेणी के सर्वेक्षण जहाजों को ज़्यादा सक्षम और अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म से बदलना है।
- इसका लक्ष्य विशेष युद्धपोत निर्माण में आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) हासिल करना है, साथ ही हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री शक्ति को बढ़ाना है।
- मुख्य विशेषताएं:
- आयाम: इस जहाज की कुल लंबाई 110 मीटर है और इसका विस्थापन लगभग 3,400 टन है।
- प्रणोदन: यह दो डीजल इंजनों से संचालित होता है, जिससे यह जहाज 18 समुद्री मील (knots) से अधिक की गति प्राप्त कर सकता है।
- उन्नत सेंसर: यह डेटा अधिग्रहण और प्रसंस्करण प्रणाली (Data Acquisition and Processing System), स्वायत्त पानी के नीचे चलने वाले वाहन (AUV), और दूर से संचालित होने वाले वाहनों (ROV) से सुसज्जित है।
- स्थिति निर्धारण और सोनार: इसमें DGPS लंबी दूरी की स्थिति निर्धारण प्रणाली और पानी के नीचे उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली इमेजिंग के लिए डिजिटल साइड स्कैन सोनार की सुविधा है।
- समय-सीमा: इसकी नींव (keel) जून 2022 में रखी गई थी, और जहाज को जून 2023 में लॉन्च किया गया था; इसके बाद समुद्री और बंदरगाह परीक्षणों का एक व्यापक कार्यक्रम शुरू हुआ।
- अनुप्रयोग:
- हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण: बंदरगाहों और हार्बर के प्रवेश मार्गों का पूर्ण-स्तरीय तटीय और गहरे पानी का सर्वेक्षण करने में सक्षम।
- नेविगेशनल मैपिंग: सुरक्षित समुद्री आवागमन के लिए महत्वपूर्ण नेविगेशनल चैनलों और मार्गों का निर्धारण।
- डेटा संग्रह: महत्वपूर्ण समुद्र-वैज्ञानिक और भू-भौतिकीय डेटा इकट्ठा करना।
- दोहरा उपयोग: एकत्रित डेटा रक्षा अनुप्रयोगों (नौसेना संचालन) और नागरिक अनुप्रयोगों (समुद्री व्यापार और पर्यावरण अनुसंधान) दोनों के लिए उपयोगी है।
