सन्दर्भ:
: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मैसूर स्थित श्री चामुंडेश्वरी मंदिर में निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाने वाले न्यायिक आदेशों की अवहेलना करने पर राज्य सरकार के प्रति कड़ी नाराज़गी व्यक्त की है।
श्री चामुंडेश्वरी मंदिर के बारे में:
- यह कर्नाटक में चामुंडी पहाड़ियों की चोटी पर स्थित एक हिंदू मंदिर है।
- यह देवी चामुंडेश्वरी को समर्पित है, जो दुर्गा का ही एक अवतार हैं।
- माना जाता है कि इस मंदिर का मूल ढांचा 12वीं सदी में होयसला शासकों द्वारा बनवाया गया था, और बाद में 17वीं सदी में विजयनगर साम्राज्य द्वारा इसका विस्तार किया गया।
- इस मंदिर तक पहुँचने के लिए बनी लगभग 1000 पत्थर की सीढ़ियाँ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं; इन्हें 17वीं सदी के मध्य में मैसूर के महाराजा डोड्डा देवराज द्वारा तराशकर बनवाया गया था।
- इसे एक शक्ति पीठ माना जाता है और यह 18 महा शक्ति पीठों में से एक है।
- वास्तुकला:
- यह मंदिर एक चौकोर संरचना वाला है।
- द्रविड़ शैली में निर्मित इस मंदिर में मुख्य द्वार, प्रवेश-कक्ष, नवरंग हॉल, अंतराला मंडप और गर्भगृह शामिल हैं।
- इसके प्रवेश द्वार पर एक सुंदर सात-मंजिला ‘गोपुरम’ (या पिरामिडनुमा शिखर) बना हुआ है, और गर्भगृह के ठीक ऊपर एक ‘विमान’ (छोटा शिखर) स्थित है।
- देवताओं, देवियों और पौराणिक आकृतियों की रंग-बिरंगी मूर्तियों से सजा यह गोपुरम मीलों दूर से ही दिखाई देता है।
- प्रवेश द्वार पर बने शिखर के दरवाज़े पर भगवान गणेश की एक छोटी सी प्रतिमा बनी हुई है।
- इस मंदिर का प्रवेश द्वार चाँदी की परत से मढ़ा हुआ है, जिस पर देवी के विभिन्न रूपों की छवियाँ अंकित हैं।
