सन्दर्भ:
: हाल ही में, ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री ने चंडीगढ़ और तमिलनाडु की पायलट जगहों पर ‘लैंड स्टैक’ लॉन्च किया और ‘राजस्व शर्तों की शब्दावली’ (GoRT) जारी की।
लैंड स्टैक के बारे में:
- यह एक इंटीग्रेटेड, GIS-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे सभी भूमि रिकॉर्ड को एक ही, आसानी से एक्सेस किए जा सकने वाले प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- यह सिंगापुर, UK और फिनलैंड जैसे देशों के सफल मॉडलों से प्रेरित है।
- इसे डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) के तहत लॉन्च किया गया था।
- लैंड स्टैक के फायदे:
- लैंड स्टैक पोर्टल भूमि से संबंधित जानकारी तक इंटीग्रेटेड एक्सेस के ज़रिए नागरिकों को सोच-समझकर फैसले लेने में मदद करता है।
- यह नागरिकों की सुविधा, पारदर्शिता और विश्वास को बढ़ाता है।
- यह अनधिकृत या नियमों का पालन न करने वाली संपत्तियों की अनजाने में खरीद के जोखिम को कम करता है।
- यह विभागों के बीच समन्वय में सुधार करता है और डेटा-आधारित शासन का समर्थन करता है।
- यह भूमि प्रशासन में एक महत्वपूर्ण ई-गवर्नेंस सुधार का प्रतिनिधित्व करता है।
- GoRT क्या है?
- यह स्थानीय, हिंदी, अंग्रेजी और रोमन लिपियों में भूमि से संबंधित विभिन्न राजस्व शब्दों के अर्थ प्रदान करता है।
- इसका उद्देश्य– राज्य-विशिष्ट शब्दावली को बदले बिना, भूमि डेटा को राष्ट्रीय स्तर पर तुलनीय और इंटरऑपरेबल बनाने के लिए शब्दावली में सामंजस्य स्थापित करना है।
- यह राजस्व अधिकारियों, नीति निर्माताओं, न्यायिक अधिकारियों और नागरिकों के लिए एक आधिकारिक संदर्भ के रूप में कार्य करता है।
