सन्दर्भ:
: भारतीय प्रधानमंत्री छठे बिम्सटेक (BIMSTEC) शिखर सम्मेलन में भाग लेने और थाई प्रधानमंत्री के साथ चर्चा करने के लिए 3-4 अप्रैल, 2025 तक बैंकॉक, थाईलैंड का दौरा करेंगे।
बिम्सटेक के बारें में:
: बिम्सटेक (बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल) एक क्षेत्रीय बहुपक्षीय संगठन है जो दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया को जोड़ता है।
: 1997 में बैंकॉक घोषणा के माध्यम से स्थापित, यह क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देता है।
: इसके सदस्य देश है:-
- दक्षिण एशिया: बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल, श्रीलंका।
- दक्षिण पूर्व एशिया: म्यांमार, थाईलैंड
: बिम्सटेक का विकास:-
- शुरुआत में इसका गठन ‘बिस्ट-ईसी’ (बांग्लादेश, भारत, श्रीलंका और थाईलैंड आर्थिक सहयोग) के रूप में किया गया था।
- 1997 में म्यांमार के शामिल होने के बाद इसका नाम बदलकर ‘बिम्स-ईसी’ कर दिया गया।
- 2004 में नेपाल और भूटान भी इसमें शामिल हो गए, जिसके बाद इसका वर्तमान नाम पड़ा।
: बिम्सटेक की मुख्य विशेषताएँ:-
- दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच पुल का काम करता है, हिमालयी क्षेत्र को बंगाल की खाड़ी से जोड़ता है।
- आर्थिक विकास, व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, सुरक्षा और कनेक्टिविटी पर ध्यान केंद्रित करता है।
- क्षेत्रीय सहयोग के लिए सार्क के विकल्प के रूप में कार्य करता है।
: बिम्सटेक में भारत की भूमिका:-
- व्यापार, सुरक्षा, समुद्री सहयोग और जलवायु कार्रवाई में अग्रणी पहल।
- क्षेत्रीय व्यापार एकीकरण को बढ़ाने के लिए बिम्सटेक मुक्त व्यापार समझौते का प्रमुख प्रस्तावक।
- बिम्सटेक देशों के बीच मजबूत भौतिक और डिजिटल संपर्क की वकालत करता है।
: बिम्सटेक में भारत का रणनीतिक दृष्टिकोण:-
- पड़ोसी पहले की नीति: दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के साथ आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को प्राथमिकता देना।
- एक्ट ईस्ट नीति: आसियान और दक्षिण पूर्व एशिया के साथ संबंधों को मजबूत करना।
- महासागर विजन: वैश्विक समुद्री सुरक्षा और आर्थिक विकास में भारत की भूमिका को बढ़ाना।
- यह यात्रा भारत की ‘पड़ोसी पहले’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीतियों के साथ-साथ अपने महासागर विजन (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
