सन्दर्भ:
: गूगल रिसर्च ने प्रोजेक्ट सनकैचर (Project Suncatcher) पेश किया है, जिसमें AI की बढ़ती बिजली की मांग से निपटने के लिए लो-अर्थ ऑर्बिट में पूरी तरह से सौर ऊर्जा से चलने वाले AI डेटासेंटर पर रिसर्च की जा रही है।
प्रोजेक्ट सनकैचर के बारे में:
- प्रोजेक्ट सनकैचर एक कॉन्सेप्ट और रिसर्च प्रोग्राम है जिसका मकसद AI डेटासेंटर को लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करना है, जो एनर्जी-इंटेंसिव AI वर्कलोड चलाने के लिए लगातार सोलर पावर पर काम करेंगे।
- इसे गूगल (गूगल रिसर्च) द्वारा लॉन्च किया गया।
- इसका उद्देश्य:
- लगातार सोलर पावर का इस्तेमाल करके AI के एनर्जी फुटप्रिंट को कम करना।
- AI कंप्यूट ग्रोथ को टेरेस्ट्रियल ग्रिड, ज़मीन के इस्तेमाल और ज़्यादा पानी वाले कूलिंग से अलग करना।
- यह कैसे काम करता है?
- लगातार सूरज की रोशनी सुनिश्चित करने के लिए सूर्य-तुल्यकालिक कक्षाओं में उड़ने वाले घने क्लस्टर वाले सैटेलाइट (एक विरल वैश्विक झुंड नहीं) तैनात करता है।
- AI वर्कलोड को अल्ट्रा-हाई-बैंडविड्थ इंटर-सैटेलाइट लिंक का उपयोग करके सैटेलाइट में डिस्ट्रीब्यूट किया जाता है; अर्थ डाउनलिंक केवल इनपुट/आउटपुट को संभालते हैं।
- वैक्यूम में काम करने के लिए रेडिएशन-टॉलरेंट TPU और विशेष थर्मल डिज़ाइन का उपयोग करता है।
- इसकी मुख्य विशेषताएं:
- हमेशा चालू रहने वाली सौर ऊर्जा- चुने हुए ऑर्बिट में कोई वातावरण नहीं, कोई रात का चक्र नहीं।
- डिस्ट्रिब्यूटेड AI ट्रेनिंग/इन्फ्रेंस को सपोर्ट करने के लिए पेटाबिट-स्केल इंटर-सैटेलाइट नेटवर्किंग।
- रेडिएशन-हार्ड कंप्यूट- टेस्ट से पता चलता है कि TPUs कई सालों के मिशन की ज़रूरतों से ज़्यादा डोज़ को सहन कर सकते हैं।
- इंटरनल क्लस्टर बैंडविड्थ की तुलना में पृथ्वी बैंडविड्थ पर कम निर्भरता।
- स्केलेबल कॉन्स्टेलेशन आर्किटेक्चर, जिसमें यूनिट्स पुरानी होने पर सैटेलाइट्स को बदल दिया जाता है।
- इसका महत्व:
- जैसे-जैसे मॉडल का आकार और ट्रेनिंग रन बढ़ते हैं, AI को स्थायी रूप से पावर देने का एक नया रास्ता प्रदान करता है।
- ज़मीनी डेटासेंटर के पास ग्रिड, पानी और ज़मीन पर दबाव कम करता है।
