सन्दर्भ:
: सरकार ने संसद को बताया कि न्यायिक दक्षता और न्याय तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए अब न्यायपालिका में AI लाया गया है अर्थात ई-कोर्ट सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल्स को इंटीग्रेट किया जा रहा है।
न्यायपालिका में AI के बारे में:
- न्यायपालिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का मतलब है न्यायिक प्रशासन, कानूनी रिसर्च, केस मैनेजमेंट और नागरिक सेवाओं को सपोर्ट करने के लिए मशीन लर्निंग (ML), नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP), ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) और स्पीच रिकग्निशन जैसी AI टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल।
- AI का इस्तेमाल फैसले लेने में मदद करने और एफिशिएंसी बढ़ाने वाले टूल के तौर पर किया जाता है, न कि न्यायिक फैसले लेने के विकल्प के तौर पर।
- उठाए गए मुख्य कदम:-
- लीगल रिसर्च एनालिसिस असिस्टेंट (LegRAA): सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी के तहत विकसित एक AI-आधारित टूल, जो जजों को कानूनी रिसर्च, डॉक्यूमेंट एनालिसिस और न्यायिक निर्णय में मदद करता है।
- डिजिटल कोर्ट 2.1: एक पेपरलेस कोर्ट एप्लीकेशन जो इंटीग्रेटेड जजमेंट डेटाबेस, एनोटेटेड डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट और ऑटोमेटेड ड्राफ्टिंग टेम्प्लेट के साथ-साथ वॉइस-टू-टेक्स्ट (श्रुति) और ट्रांसलेशन (पाणिनी) प्रदान करता है।
- SUPACE (सुप्रीम कोर्ट पोर्टल असिस्टेंस इन कोर्ट एफिशिएंसी): एक एक्सपेरिमेंटल AI टूल जिसका मकसद मामलों के तथ्यात्मक मैट्रिक्स को समझना और इंटेलिजेंट मिसाल सर्च को सक्षम बनाना है।
- न्याय श्रुति और ई-साक्ष्य (ICJS): वर्चुअल गवाही, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और सबूतों की डिजिटल रिकॉर्डिंग के लिए AI-सक्षम प्लेटफॉर्म, जो आपराधिक न्याय में गति और पारदर्शिता में सुधार करते हैं।
