सन्दर्भ:
: हाल ही में, भारत के प्रधानमंत्री ने अपने “मन की बात” कार्यक्रम के दौरान आंध्र प्रदेश के नरसपुर में स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए नरसपुरम लेस क्राफ्ट उत्पादों की तारीफ़ की।
नरसपुरम लेस क्राफ्ट के बारे में:
- नरसपुरम आंध्र प्रदेश राज्य में गोदावरी नदी के किनारे स्थित है।
- नरसपुरम लेस क्राफ्ट का इतिहास:
- माना जाता है कि इस क्षेत्र के किसान समुदाय की महिलाओं ने लगभग 150 साल पहले रंगीन लेस से बहुत आकर्षक कलाकृतियाँ बनाना शुरू किया था।
- यह शिल्प भारतीय अकाल (1899) और महामंदी (1929) से बचा रहा।
- कच्चा माल: मुख्य रूप से अलग-अलग मोटाई और रंगों के महीन सूती धागों का उपयोग किया जाता है।
- कारीगर सजावटी चीज़ों के लिए रेशम, रेयॉन, या सिंथेटिक धागों का भी इस्तेमाल करते हैं, और एक्सपोर्ट-क्वालिटी डिज़ाइन को बेहतर बनाने के लिए मोती और सेक्विन भी जोड़े जाते हैं।
- इस्तेमाल किए जाने वाले औजार: मुख्य औजार क्रोशिया हुक है, जो अलग-अलग पैटर्न और टेक्सचर बनाने के लिए अलग-अलग साइज़ में उपलब्ध है।
- डिज़ाइन: यह शिल्प प्रकृति और पारंपरिक मोटिफ से प्रेरित जटिल फूलों वाले, ज्यामितीय और पैस्ले पैटर्न दिखाता है।
- नरसपुरम का प्रसिद्ध हाथ से बना क्रोशिया उद्योग डॉली, तकिए के कवर, कुशन कवर, बेड स्प्रेड, टेबल-रनर और टेबल क्लॉथ आदि बनाता है।
- इसे ज्योग्राफिकल इंडिकेशन टैग से मान्यता मिली है।
