सन्दर्भ:
: हाल ही में, भारत ने असम के GI-टैग वाले 25 मीट्रिक टन जोहा चावल (Joha Rice) के यूनाइटेड किंगडम और इटली को निर्यात की सुविधा प्रदान की है।
जोहा चावल के बारें में:
- यह असम का एक देसी चावल है।
- यह एक देसी खुशबूदार चावल की किस्म है, जो अपनी खास महक, बारीक दानों और ज़बरदस्त स्वाद के लिए जानी जाती है।
- इसे साली/खरीफ मौसम में उगाया जाता है।
- इसमें शामिल जोहा की मुख्य किस्में हैं– कोला जोहा, केतेकी जोहा, बोकुल जोहा और कुनकुनी जोहा।
- यह चावल कई एंटीऑक्सीडेंट, फ्लेवोनोइड और फेनोलिक तत्वों से भी भरपूर होता है।
- इसे साल 2017 में ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग मिला था।
- चावल की इस किस्म में दो अनसैचुरेटेड फैटी एसिड होते हैं– लिनोलिक एसिड (ओमेगा-6) और लिनोलेनिक एसिड (ओमेगा-3)।
- ये ज़रूरी फैटी एसिड (जिन्हें इंसान खुद नहीं बना सकते) शरीर की कई शारीरिक स्थितियों को ठीक रखने में मदद कर सकते हैं।
- भौगोलिक संकेत (GI) टैग:
- यह एक ऐसा चिह्न है जिसका उपयोग उन उत्पादों पर किया जाता है जिनका कोई विशिष्ट भौगोलिक मूल होता है, और जिनमें उस मूल के कारण ही कुछ विशेष गुण या प्रतिष्ठा होती है।
- इसका उपयोग आमतौर पर कृषि उत्पादों, खाद्य पदार्थों, वाइन और स्पिरिट पेय, हस्तशिल्प और औद्योगिक उत्पादों के लिए किया जाता है।
- ‘माल का भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999′ का उद्देश्य भारत में माल से संबंधित भौगोलिक संकेतों के पंजीकरण और बेहतर संरक्षण की व्यवस्था करना है।
- यह GI टैग 10 वर्षों के लिए वैध होता है, जिसके बाद इसे नवीनीकृत (renew) किया जा सकता है।
