सन्दर्भ:
: हाल ही में, यूनेस्को द्वारा यूनेस्को के मोंडियाकल्ट सम्मेलन में चोरी की गई सांस्कृतिक वस्तुओं का आभासी संग्रहालय का शुभारंभ किया।
चोरी की गई सांस्कृतिक वस्तुओं का आभासी संग्रहालय के बारे में:
: यह एक अभिनव डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है जो समुदायों को उनकी चोरी हुई सांस्कृतिक धरोहरों से फिर से जोड़ता है।
: इसका उद्देश्य- इस परियोजना का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर चोरी हुई सांस्कृतिक वस्तुओं का पहला वर्चुअल इमर्सिव रियलिटी संग्रहालय तैयार करना है।
: यह सांस्कृतिक संपत्ति की अवैध तस्करी के परिणामों के बारे में आम जनता में जागरूकता बढ़ाने और चोरी हुई वस्तुओं की बरामदगी में योगदान देगा।
: इसका शुभारंभ सांस्कृतिक नीतियों और सतत विकास पर विश्व सम्मेलन (MONDIACULT 2025) में किया गया।
: इस संग्रहालय को सऊदी अरब साम्राज्य द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है और इस परियोजना को इंटरपोल के सहयोग से विकसित किया गया है।
: इस डिजिटल संग्रहालय में वर्तमान में 46 देशों की लगभग 240 गुमशुदा वस्तुएँ प्रदर्शित हैं।
: भारतीय मंदिर की मूर्तियाँ:-
- संग्रहालय में भारत से भेजी गई दो वस्तुएँ प्रदर्शित हैं- छत्तीसगढ़ के पाली स्थित महादेव मंदिर से प्राप्त 9वीं शताब्दी की दो बलुआ पत्थर की मूर्तियाँ।
- पहली मूर्ति, नटराज की है, जिसमें शिव को उनके ब्रह्मांडीय नृत्य में दर्शाया गया है।
- दूसरी मूर्ति, सृष्टिकर्ता ब्रह्मा की है, जो ललितासन में बैठे हुए हैं और उनके तीन मुख और चार भुजाएँ हैं, तथा वे माला और वेद जैसे पवित्र प्रतीक धारण किए हुए हैं।
मोंडियाकल्ट सम्मेलन:
: यह सांस्कृतिक नीतियों और सतत विकास पर विश्व सम्मेलन है।
: यूनेस्को द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में वैश्विक सांस्कृतिक नीति के भविष्य को आकार देने के लिए दुनिया भर के मंत्रियों और सांस्कृतिक नेतृत्व शामिल होते है।
: ज्ञात हो कि मोंडियाकल्ट 2025 में भारत की भागीदारी ने वैश्विक सांस्कृतिक संवाद के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता और संस्कृति को सतत व समावेशी विकास की आधारशिला के रूप में आगे बढ़ाने के संकल्प की पुन: पुष्टि की।
