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सन्दर्भ–वाराणसी के अत्यधिक कुशल खादी बुनकरों द्वारा तैयार किए गए पश्मीना उत्पादों को वाराणसी में केवीआईसी (KVIC-Khadi and Village Industries Commission) के अध्यक्ष श्री विनय कुमार सक्सेना ने लॉन्च किया।
प्रमुख तथ्य-यह पहला अवसर है जब पश्मीना उत्पाद लेह-लद्दाख क्षेत्र तथा जम्मू और कश्मीर से बाहर तैयार किए जा रहे हैं।
:पश्मीना आवश्यक कश्मीरी कला के रूप में विख्यात है,लेकिन देश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में तैयार पश्मीना इस विरासती कला को क्षेत्रीय सीमा से मुक्त करता है।
:वाराणसी में पश्मीना उत्पादन की यह यात्रा लद्दाख से कच्ची पश्मीना ऊन के संग्रह से शुरू होती है।
:वाराणसी के बुनकरों द्वारा तैयार पश्मीना उत्पादों पर बुनकरों के नाम और वाराणसी शहर के नाम को अंकित किया जाएगा।
:वाराणसी में तैयार पश्मीना उत्पाद से ही वाराणसी में खादी की कुल बिक्री में लगभग 25 करोड़ रुपए और जुड़ जाएंगे।
:वाराणसी में पश्मीना की फिर से खोज करने के पीछे विचार लद्दाख में महिलाओं के लिए रोजगार के सतत अवसर पैदा करना और वाराणसी में पारंपरिक बुनकरों के कौशल को विविध रूप देना है।
:विशेष स्थिति में वाराणसी में पश्मीना बुनकरों को 50% अतिरिक्त मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है,जो की दस्तकारों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है।
:सामान्य ऊन के शॉल की बुनाई के लिए बुनकरों को 800 रुपए का पारिश्रमिक दिया जाता है जबकि पश्मीना शॉल बनाने के लिए वाराणसी में पश्मीना बुनकरों को 1300 रुपए पारिश्रमिक का भुगतान किया जाता है।
:लद्दाख में सुचारु आजीविका के लिए KVIC ने लेह में पश्मीना ऊन प्रसंस्करण इकाई की स्थापना भी की है,क्योकि अत्यधिक सर्दी के कारण लगभग 6 माह तक लेह-लद्दाख में कताई का काम बंद रहता है।
:वाराणसी में पश्मीना बुनाई का कार्य 4 खादी संस्थानों द्वारा किया जा रहा है-
1-कृषक ग्रामोद्योग विकास संस्थान वाराणसी,
2-श्रीमहादेव खादी ग्रामोद्योग संस्थान गाजीपुर,
3-खादी कम्बल उद्योग संस्थान गाजीपुर
4-ग्राम सेवा आश्रम गाजीपुर
:केवीआईसी अपने शोरूमों,दुकानों तथा ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से “मेड इन वाराणसी” पश्मीना उत्पादों की बिक्री करेगा।