सन्दर्भ:
: झारखंड के वेस्ट सिंहभूम ज़िले में चलाए गए बड़े माओवादी विरोधी अभियान, ऑपरेशन मेगाबुरु (Operation Megaburu) में टॉप CPI (माओवादी) नेता अनल उर्फ पतिराम मांझी समेत 16 माओवादी मारे गए।
ऑपरेशन मेगाबुरु के बारे में:
- ऑपरेशन मेगाबुरु CPI (माओवादी) के खिलाफ़ एक बड़े पैमाने का काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशन है, जिसे झारखंड में माओवादियों के आखिरी बड़े गढ़ों में से एक, सारंडा जंगल इलाके में चलाया गया।
- शुरू किया गया: जनवरी 2026
- जगह: कुमडी इलाका, किरीबुरु पुलिस स्टेशन, पश्चिम सिंहभूम ज़िला, झारखंड
- इसमें शामिल फ़ोर्स: सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स (एलीट कोबरा यूनिट) और झारखंड पुलिस
- इसका उद्देश्य:
- माओवादी टॉप लीडरशिप को खत्म करना और कमांड स्ट्रक्चर को खत्म करना।
- सिंहभूम इलाके में बचे हुए माओवादी ठिकानों को साफ़ करना।
- मार्च 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने के भारत सरकार के लक्ष्य को आगे बढ़ाना।
- इसकी मुख्य बातें:
- इंटेलिजेंस पर आधारित ऑपरेशन: सेंट्रल कमेटी के सदस्यों सहित सीनियर माओवादी नेताओं की मौजूदगी के बारे में खास इनपुट के आधार पर शुरू किया गया।
- एलीट फ़ोर्स की तैनाती: मुश्किल इलाके में घने जंगल में लड़ाई के लिए लगभग 1,500 कोबरा कमांडो तैनात किए गए।
- एक साथ लीडरशिप को खत्म करना: कई एरिया, सब-ज़ोनल और रीजनल कमेटी के सदस्यों को खत्म किया गया, जिसमें महिला कैडर भी शामिल थीं।
- झारखंड में सबसे बड़ी बरामदगी: राज्य में एक ही मुठभेड़ में सबसे ज़्यादा माओवादियों के शव बरामद किए गए।
- इसका महत्व:
- झारखंड में लगभग सभी सेंट्रल कमेटी के सदस्यों को खत्म कर दिया गया; अब सिर्फ़ थोड़ी सी मौजूदगी बची है।
- इस बात की पुष्टि करता है कि माओवादी अब बड़े इलाकों के बजाय सीमित जंगल के ठिकानों तक ही सीमित हैं।
- नागरिकों का भरोसा बढ़ाता है और लंबे समय से प्रभावित आदिवासी इलाकों में डेवलपमेंट की गतिविधियों को मुमकिन बनाता है।
