बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता सूचकांक जारी

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बुनियादी साक्षरता सूचकांक जारी

सन्दर्भ- हाल ही में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद् द्वारा बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता सूचकांक जारी किया गया।
प्रमुख तथ्य-:इस रिपोर्ट को इंस्टिट्यूट फॉर कॉम्पेटिटिवनेस ने बनाया है।
:रिपोर्ट में चार श्रेणियों को दिखाया गया है-
:बड़े राज्य,छोटे राज्य,केंद्रशासित प्रदेश और उत्तर पूर्वी राज्य
:इसके अंतर्गत छोटे राज्यों में केरल ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया जबकि झारखण्ड सबसे ख़राब प्रदर्शन करने वाला राज्य रहा।
:लक्षद्वीप केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में और मिजोरम उत्तर पूर्वी राज्यों में उच्चतम स्कोरिंग प्राप्त किये।
:केंद्र शासित प्रदेशों में लद्दाख का और उत्तर पूर्वी राज्यों में अरुणाचल प्रदेश का सबसे ख़राब प्रदर्शन रहा है।
:बड़े राज्यों की श्रेणी में पश्चिम बेनेगल ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।
:समग्र सूचकांक में ख़राब प्रदर्शन करने वाले राज्य झारखण्ड,ओडिशा,मध्यप्रदेश,उत्तर प्रदेश और बिहार।

क्या है यह सूचकांक

:यह सूचकांक भारतीय राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में दस वर्ष से कम उम्र के बच्चों में बुनियादी शिक्षा की समग्र स्थिति पर आधारित होता है,जिसमे पांच स्तम्भ वाले 41 संकेतकों को शामिल है।
:ये पांच स्तम्भ है-शिक्षा तक पहुंच,शैक्षणिक बुनियादी ढांचा,सीखने के परिणाम और शासन और बुनियादी स्वास्थ्य।
:यह भारत के सतत विकास लक्ष्यों 2030 को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
रिपोर्ट का सार-:यह रिपोर्ट राष्ट्रिय शिक्षा नीति 2020 और निपुण(NIPUN) भारत दिशानिर्देशों जैसे सुनियोजित प्रारंभिक हस्क्षेपों की भूमिका को रेखांकित करती है,जिससे दीर्घकालिक बेहतर शिक्षण परिणाम प्राप्त होते है।
:गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच सभी बच्चो का मौलिक अधिकार है और एक बच्चे के जीवन के प्रारंभिक वर्षों को उनके सामने आने वाली सामाजिक आर्थिक,मनोवैज्ञानिक और तकनिकी बाधाओं की पृष्ठभूमि में समझने की जरुरत है,जो विभिन्न तरीकों से बच्चों की क्षमताओं को प्रभावित करते है।

FLN-मुलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता

:यह बुनियादी पढ़ने लिखने और गणित कौशल को संदर्भित करता है,शुरूआती शिक्षा के वर्षों में पिछड़ना अर्थात प्री-स्कूल और प्राथमिक शिक्षा में बच्चो को अधिक कमजोर बनाते है,क्योकि यह उनके सीखने के परिणामो पर नकारात्मक प्रभाव डालते है।
:भारत में पूर्व प्राथमिक और प्राथमिक कक्षाओं में सभी बच्चों के लिए शिक्षा के गुणवत्ता स्तर तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए मूलभूत शिक्षा पर ध्यान देने की जरुरत है।
:मौजूदा मुद्दों के अतिरिक्त COVID-19 ने भी बच्चों की समग्र शिक्षा में प्रौद्योगिकी के महत्त्व को रेखांकित किया है।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद्(EAC-PM)-यह भारत सरकार को विशेष रूप से प्रधानमंत्री आर्थिक और सम्बंधित मुद्दों पर सलाह देने वाली एक स्वतंत्र निकाय है।
मुख्यालय- नई दिल्ली
अध्यक्षता -डॉ बिबेक देबराय


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