“बिरसा मुण्डा – जनजातीय नायक” पुस्तक का विमोचन

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BIRSA MUNDA-JANJATIYA NAYAK
“बिरसा मुण्डा – जनजातीय नायक” पुस्तक
PHOTO:PIB

सन्दर्भ-केंद्रीय शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने “बिरसा मुण्डा—जनजातीय नायक” पुस्तक का विमोचन किया।
प्रमुख तथ्य-यह पुस्तक गुरु घासीदास विश्वविद्यालय,बिलासपुर के प्रोफेसर और कुलपति आलोक चक्रवाल,द्वारा लिखित है।
:इस किताब के माध्यम से अमर क्रांतिकारी भगवान बिरसा मुंडा जी के संघर्ष तथा स्वतंत्रता आंदोलन में वनवासियों के योगदान को सामने लाने का एक व्यापक प्रयास किया गया है।

बिरसामुंडा के बारे में-

:बिरसा मुंडा(Birsa Munda) का जन्म 1875 में रांची के लिहतु गांव में हुआ था।
:इनके पिता का नाम सुगना मुंडा और माता का नाम करमी हातू था।
:बिरसा मुंडा के मन में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ बचपन से ही विद्रोह था।
:प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त करने के उपरांत चाईबासा इंग्लिश मिडिल स्कूल में पढ़ने का मौका मिला।
:1895 में बिरसा मुंडा एक नेता के रूप उभरने लगे थे,साथ ही पैगम्बर भी बन गए थे।
:बिरसा मुंडा के नेतृत्व में वर्ष 1899-1900 में हुआ मुंडा विद्रोह छोटा नागपुर (झारखंड) के क्षेत्र में सर्वाधिक चर्चित विद्रोह था,जिसे ‘मुंडा उलगुलान’ (विद्रोह) भी कहा जाता है।
:इस विद्रोह की शुरुआत मुंडा जनजाति की पारंपरिक व्यवस्था खूंटकटी की जमींदारी व्यवस्था में बदलाव के कारण हुई।
:फरवरी 1900 में बिरसा मुंडा को सिंहभूमि से गिरफ्तार कर रांची जेल में डाल दिया गया जहाँ जून 1900 में उनका निधन हो गया।
:आदिवासियों के विरुद्ध शोषण एवं भेदभाव के विरुद्ध उनके संघर्ष के कारण ही वर्ष 1908 में छोटा नागपुर काश्तकारी अधिनियम पारित किया गया जिसने आदिवासी लोगो से गैर-आदिवासी लोगो में भूमि का हस्तानांतरण प्रतिबंधित कर दिया गया।


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