पुस्तक:भारतीय संस्कृति में मानवीय जिजीविषा

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BHARTIY SANSKRITI ME MANVIY JIJIVISHA
पुस्तक:भारतीय संस्कृति में मानवीय जिजीविषा

सन्दर्भ-भारत के राष्ट्रपति ने “भारतीय संस्कृति में मानवीय जिजीविषा” पुस्तक की प्रथम प्रति प्राप्त की।
प्रमुख तथ्य-यह पुस्तक आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबंधों का संकलन है।
:राष्ट्रपति ने पहली प्रति आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी मेमोरियल ट्रस्ट की अध्यक्ष एवं निबंध संकलन की संपादक डॉ अपर्णा द्विवेदी से प्राप्त की।
:भारतीय परंपरा में आधुनिकता और आधुनिकता में परंपरा के अप्रतिम द्रष्टा थे,आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जिन्होंने भाषा विज्ञान,समालोचना,सांस्कृतिक विमर्श, उपन्यास तथा निबंध के क्षेत्र में नए मार्ग प्रशस्त किए।
:संत कबीर को महान साहित्यिक कवि के रूप में प्रतिष्ठित करने का श्रेय भी उन्हें ही दिया जाता है।
आचार्य हजारी प्रसाद-इनका जन्म 1907 में बलिया जिले के दुबे छपरा नामक गांव में हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई,उसके बाद इन्होने काशी हिन्दू विश्व विद्यालय से ज्योतिष व साहित्य में आचार्य की उपाधि प्राप्त की।
:1930 में हिंदी व संस्कृत के रूप में विश्व भारती,शांति निकेतन चले गए जहाँ रविन्द्र नाथ टैगोर के सानिध्य में साहित्य सृजन में लग गए।
:इन्होने कई निबंध लिखे है जिनमे प्रमुख है-अशोक के फूल,कुटज,आलोक पर्व,कल्पलता,विचार और वितर्क,विचार प्रवाह इत्यादि।


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