डेली करेंट अफेयर्स 7 नवंबर 2021

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1-WTO कि 12वीं मंत्रिस्तरीय(MC-12)सम्मलेन का होगा आयोजन

सन्दर्भ- विश्व व्यापार संगठन(WTO) की 12वीं मंत्रिस्तरीय सम्मलेन का आयोजन इस महीने के अंत में स्विट्ज़रलैंड के जेनेवा में होने जा रहा है जो 2020 के जून में कजाकिस्तान में आयोजित होने के डेढ़ वर्ष बाद होने जा रहा है।
प्रमुख तथ्य-:WTO के अनुमान के अनुसार वैश्विक व्यापर की मात्रा 2021 में लगभग 11% और 2022 में लगभग 5% तक बढ़ सकती है।
:इस बात पर विचार हो रही है की,कि कैसे आर्थिक रूप से पिछड़े देश अपने आर्थिक विकास की जरूरतों के अनुरूप वैश्विक व्यापार में अपने भागीदारी को सुरक्षित रख सकते है।
:साथ मारकेश ट्रीटी उद्देश्यों के अंतर्गत इन देशों को भी एक उचित प्रतिस्पर्धा का माहौल और मौका कैसे मिले
:इस बात पर चर्चा होगी की WTO में कई बार अन्याय पूर्ण व्प्यापार व्यवस्था के कारण उचित भागीदरी से चूक जाते है इस व्यस्था को कैसे तक किया जाये
:कुछ व्यापार सेवाएं जैसे इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स,निवेश सुविधा,और मत्स्य पालन सब्सिडी पर भी WTO के नियमों अपनाने पर चर्चा होंगी क्योकि इन क्षेत्रों को लेकर विकसित,और विकासशील देशो के बीच विवाद की स्थिति बानी ही रहती है।
कुछ अन्य मुद्दे भी है जैसे –
आईपीआर(IPR) और वैक्सीन मुद्दा-कोविं के समय में इन देशों के पास वैक्सीन बनाने के जो अधिकार सुरक्षित थे वह अन्य कमजोर देशो के लिए घातक हो सकते है क्यों की WTO की IPR नीति इसी अनुरूप है ऐसे में मानवता सहारे ही लोगो तक वैक्सीन की पहुंच को सुलभ बना सकते है ऐसे में WTO की इस आईपीआर नीति में कुछ बदलाव जरुरी है जिससे की TRIPS नियमो में बदलाव हो सके।
2020 भारत और दक्षिण अफ्रीका ने वैक्सीन और अन्य चिकित्स्कीय उत्पादों को लेकर एक प्रस्ताव भी दिया था और मांग की थी की,कि आईपीआर के कई रूपों को लागु करने से छूट दी है ताकि उपयोगी उपचार सुलभ हो सके। हालाँकि अमेरिका का इसमें आंशिक समर्थन ही मिला।
मत्स्य पालन और ई-कॉमर्स मुद्दा-WTO की मत्स्य छूट पर नियमो की अनदेखी से भारत सहित कई ने विकासशील देशो को भरी नुकसान इतना पद रहा है जिससे कास तौर पर छोटे मछुआरों की आजीविका प्रभावित हो रही है क्यों की वाणिज्यिक स्तर पर नियमो में कोई छूट नहीं दी गयी है।
हाल ही में (OECD) अर्थात आर्थिक सहयोग और विकास संगठन देशो और G-20 के सदस्य देशो ने डिजिटल कंपनियों पर वैश्विक न्यूनतम कर (GMT- 15%) लगाने के प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त की है,परन्तु अभी और भी समस्याएं है जिन पर बात होनी बाकी है,जैसे मॉल और सेवा व्यापार का उदारीकरण,डेटा का मुक्त प्रवाह इत्यादि।
निवेश और विभाजन पर WTO का रवैया हमेशा से पक्षपातपूर्ण और विभाजनकारी रहा है इस मुद्दे पर भी चर्चा होगी।
WTO के बारे में-इसका गठन 1947 में संपन्न हुवे प्रशुल्क और व्यापर पर सामान्य समझौते अर्थात GATT की समाप्ति के साथ हुवा,हालाँकि इसके गठन की रुपरेखा 1986-1994 के उरुग्वे दौर की वार्ता के साथ शुरू हो गयी थी और 1994 के मोरक्को के मारकेश में संपन्न मारकेश समझौते के तहत पूर्णतः स्थापित हुवा परन्तु इसका कार्य 1 जनवरी 1995 शुरू हुआ। यह एक अंतराष्ट्रीय संगठन है जो देशों के बीच व्यापार के नियमो को विनियमित करता है,इसके सदस्यों की कुल संख्या EU सहित 164 जिसमे 23 देश पर्यवेक्षक है।
:इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में है।

2-अन्नपूर्णा मूर्ति की भारत में हो रही है वापसी

प्रमुख तथ्य -:हाल ही में 18वीं शताब्दी की देवी अन्नपूर्णा की मूर्ति को कनाडा से भारत वापस लाया गया है यह मूर्ति 9 साल पहले उत्तर प्रदेश के वाराणसी से चोरी हो गई थी।
:इसे कनाडा के लिए रेजीना विश्वविद्यालय में मैकेंजी आर्ट गैलरी में रखा गया था परन्तु जब पता चला तो मूर्ति को वापस करने का फैसला लिया। 
:18वीं शताब्दी में इस मूर्ति को वाराणसी शैली में तराशा गया है।
:यह देवी अन्नपूर्णा की मूर्ति है जिसके एक हाथ में खीर का कटोरा और दूसरे हाथ में एक चम्मच है।
:भारतीय लोग मां अन्नपूर्णा को भोजन की देवी मानते हैं।
:इस मूर्ति को पांच दिवसीय शोभायात्रा के बाद पुनः वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित किया जायेगा।
:भारत सरकार इस प्रतिमा को 11 नवंबर को आयोजित एक समारोह में उत्तर प्रदेश सरकार को सैंपेगी,जिसकी प्राणप्रतिष्ठा मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ द्वारा किया जायेगा।
:विशेष बात यह है कि प्रधानमंत्री के शासन में अब तक 42 दुर्लभ धरोहरो को भारत में वापसी हुइ है,जबकि 1976 से 2013 तक सिर्फ 13 दुर्लभ पेंटिंग्स और मूर्तियों को ही वापस लाया जा सका था।
:अभी भी 157 मूर्तियां और पेंटिंग्स विदेशो में है जिनको वापस ले आने के लिए बातचीत जारी है।

3-गोवा समुंद्री संगोष्ठी 2021 का आयोजन

प्रमुख तथ्य -:गोवा मैरिटाइम कॉन्क्लेव यानी (GMC)-2021 का तीसरा संस्करण 7 से 9 नवंबर तक लेवल बार कॉलेज गोवा के तत्वाधान में आयोजित किया जाना है।
:गोवा मैरिटाइम कॉन्क्लेव भारतीय नौसेना की आउटरीच(आगे बढ़ने की) पहल है जो समुद्री सुरक्षा के अभ्यासकर्ताओं और शिक्षाविदों के सामूहिक ज्ञान का उपयोग करने के लिए एक बहुराष्ट्रीय मंच प्रदान करती है।
:इस साल की थीम-मैरिटाइम सिक्योरिटी एंड इमर्जिंग नॉन ट्रेडिशनल थ्रेट्स:ए केस फॉर प्रोएक्टिव रोल फॉर आइओआर(IOR) नेवीज रखी गई है।
:भारतीय नौसेना के अध्यक्ष एडमिरल करमबीर सिंह हिंद महासागर के 12 नौसेना समुद्री बलों के प्रमुखों वाले दल की मेजबानी करेंगे,इन 12 देशों में शामिल है बांग्लादेश,कोमोरोस,इंडोनेशिया,मेडागास्कर,मलेशिया,मालदीव,मॉरीशरणनीतिक परिदृश्य का केंद्र बनाना है,इसके साथ ही इसका लक्ष्य क्षेत्रीय हितधारकों को एक साथ लाना और समकालीन समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सहयोगी कार्यान्वयन नीतियों पर विचार विमर्श करना है।
:कॉन्क्लेव के एक भाग के रूप में मेक इन इंडिया प्रदर्शनी में भारत के स्वदेशी जहाज निर्माण उद्योग और मर्मगाओं पोर्ट ट्रस्ट गोवा में पनडुब्बियों के लिए डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू वेसल यानी (डीएसआरवी) की क्षमता को देखने का अवसर दिया जाएगा।

4-मोलनुपिरावीर(Molnupiravir) कोविड उपचार के लिए पहली अधिकृत दवा बनी

प्रमुख तथ्य-:हाल ही में यूके के मेडिसिंस एंड हेल्थ केयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी यानी (एमएचआरए) कोविड-19 के उपचार के लिए एक एंटीवायरल दवा मोलनुपिरावीर(lagevrio) के उपयोग को मंजूरी दे दी है।
:इसे रिजबैक बायोथेराप्यूटिक्स तथा मर्क शार्प एंड डोहमें(MSD) द्वारा विकसित किया गया है।
:इस मंजूरी के साथ ही कोविड-19 के इलाज के लिए यह विश्व की पहली अधिकृत दवा बन गई है,साथ ही UK पहला अधिकृत देश बन गया है।
:यह हल्के व मध्यम कोविड-19 उपचार के लिए प्रभावी है।
:यह दवा रोग की गंभीरता को बढ़ने से रोकने में तथा शरीर में वायरस के स्तर को कम रखने में प्रभावी पायी गयी है,जिसका उपयोग कोरोनावायरस अपनी संख्या बढ़ाने में करता है।
कैसे काम करता है मोलनुपिरावीर-
यह एक ऐसे एंजाइम को लक्ष्य बनता है जिसका उपयोग कोरोना वायरस अपनी संख्या बढ़ाने में करता है,यह वायरस के आनुवांशिक कोड में एरर(त्रुटि) को शामिल करता है,जो मानव कोशिकाओं में वायरस के फैलने की दर को कम कर देता है।

5-गोवा में होने वाले 52वें IFFI(इफ्फी) 2021में भारतीय पैनोरमा की फिल्मो के चयन की घोषणा

चर्चा में क्यों है – गोवा में होने वाले इस 52वें भारतीय अंतरष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भारतीय पनोरमा खंड में दिखाई जाने वाली फिल्मो का आधिकारिक घोषणा कर दी गयी है।
प्रमुख तथ्य- :महोत्सव का आयोजन 20 -28 नवंबर 2021 को भारत के फिल्म समारोह निदेशालय,सूचना और प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा गोवा राज्य सरकार के सहयोग से किया जा रहा है।
:आभाषी/व्यक्तिगत पंजीकरण के बाद लोग चयनित फिल्मो को देख सकते है।
:चयनित फिल्मो के प्रदर्शन के समय में फिल्मों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।
:इन फिल्मो का चयन प्रसिद्द फिल्म अभिनेता और निर्देशक एस वी राजेंद्र सिंह बाबू की अध्यक्षता में 13 सदस्यीय फीचर फिल्म ज्यूरी ने किया है।
:भारतोय फीचर फिल्म खंड का उद्घाटन एमी बरुआ द्वारा निर्देशित फिल्म सेमखोर(दिमासा) से किया जायेगा जबकि गैर फीचर फिल्म श्रेणी में राजीव प्रकाश द्वारा निर्देशित फिल्म वेद द विज़नरी का प्रदर्शन जायेगा।
:IFFI महोत्सव दौरान 24 फीचर फिल्म और 20(203 गैर फिल्मो) गैर फीचर फिल्मे दिखाई जाएँगी।
भारतीय पैनोरमा-इसकी स्थापना 1978 में भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) का एक प्रमुख घटक के रूप में किया गया,जिसके तहत फिल्म कला के प्रचार के लिए सर्वश्रेष्ठ समकालीन भारतीय फिल्मों का चयन किया जाता है। सिनेमाई कला की मदद से भारत की समृद्ध संस्कृति और विरासत के साथ भारतीय फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए इसे अस्तित्व लाया गया था,अपनी स्थापना के बाद से ही भारतीय पैनोरमा वर्ष की सर्वश्रेष्ठ भारतीय फिल्मों को प्रदर्शित करने के लिए पूरी तरह से समर्पित रहा है।
उद्देश्य क्या है-:विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत इन फिल्मो गई लाभकारी स्क्रीनिंग के द्वारा फिल्म कला को बढ़ावा देने सिनेमाई,विषयगत और सौंदर्य उत्कृष्ठता की फीचर और गैर फीचर फिल्मो का चयन करना है।
IFFI के बारे में- :इसकी स्थापना 24 जनवरी 1952 में हुआ था,यह एशिया के सबसे प्रमुख फिल्म समारोहों में से एक है। :पहले यह अन्य स्थानों पर आयोजित होता था, परन्तु 2004 के बाद से इसे गोवा में ही स्थायी कर दिया गया है,जहां इसे अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव दिशानिर्देशों और प्रोटोकॉल के अनुसार डीएफएफ(डारेक्टोरेटऑफ़ फिल्म फेस्टिवल्स) और गोवा राज्य सरकार के द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है। जिसका उद्देश्य है दुनिया के सिनेमाघरों के लिए फिल्मकला की सर्वोच्चता को प्रदर्शित करने हेतु एक साझा मंच तैयार करना तथा विभिन्न देशों की फिल्म संस्कृतियों उनके सामाजिक और सांस्कृतिक लोकाचार के सन्दर्भ में समझ कर उनकी सराहना करना,और दुनिआ के लोगो के बीच आपसी प्रेम,दोस्ती और भाईचारे तथा सहयोग को बढ़ावा देना।
:इसके पहले संकरण का आयोजन 24 जनवरी से 1 फ़रवरी के बीच मुम्बई में किया गया जिसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा किया गया था।तीसरे संस्करण जो 8-21 जनवरी1965 में दिल्ली में आयोजित हुआ था स्पर्धी बन गया था।
:35वें संस्करण 2004 में इसे त्रिवेंद्रम से गोवा लाया गया तब से अब तक वार्षिक रूप में आयोजित किया जा रहा रहा है।
:अपने 5वें संस्करण 1975 में एक स्थायी प्रतिक चिन्ह को अपनया गया जिसमे राष्ट्रीय पक्षी मोर का प्रतिक और वसुधैव कुटुम्बकम जैसे आदर्श वाक्य को स्थायी जगह दिया गया।
इसके प्रमुख अवार्ड है- गोल्डन पीकॉक और सिल्वर पीकॉक,लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड,तथा इंडियन पर्सनालिटी ऑफ़ दी ईयर इत्यादि।
:2013 में भारतीय सिनेमा के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में फिल्मो में उत्कृष्ट सेवा वालों को सम्मानित करने हेतु इंडियन पर्सनालिटी ऑफ़ दी ईयर अवार्ड की शुरुआत की गयी और इस पहले अवार्ड को फिल्म अभिनेत्री वहीदा रहमान को दिया गया था।

https://iffigoa.org/ or https://virtual.iffigoa.org/ 

 

 


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