कर्नाटक Research and Development Policy स्थापित करने वाला पहला राज्य

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Karnatka Research and Development Policy Sthapit Karne wala Pahala Rajy
कर्नाटक Research and Development Policy स्थापित करने वाला पहला राज्य

सन्दर्भ:

:कर्नाटक एक विशेष Research and Development Policy (अनुसंधान और विकास नीति) स्थापित करने वाला भारत का पहला राज्य बनने वाला है।

प्रमुख तथ्य:

:इसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है।
:इसकी पृष्ठभूमि के लिए कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने आर एंड डी टास्क फोर्स के अध्यक्ष, प्रोफेसर अशोक एस शेट्टार, केएलई टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (केएलई टेक), कर्नाटक के कुलपति और अन्य अधिकारियों के साथ बेंगलुरु, कर्नाटक में एक बैठक की अध्यक्षता की।
:मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रस्तावित नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक सिस्टम तैयार करने का निर्देश दिया है।
:टास्क फोर्स की बैठक में डॉ. अश्वत्नारायण सी.एन., सूचना प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी और विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री; कर्नाटक के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव मंजूनाथ प्रसाद एन; ईवी रमना रेड्डी, अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग और वाणिज्य विभाग, कर्नाटक सरकार; व अन्य।

Research and Development Policy की मुख्य विशेषताएं:

:टास्क फोर्स के अनुसार, कर्नाटक में आरएंडडी में उत्कृष्टता हासिल करने की जबरदस्त क्षमता है।
Research and Development Policy को सरल बनाया गया है, किसी भी अनुसंधान एवं विकास को तभी प्रभावी माना जाता है जब यह लोगों के दैनिक जीवन में प्रासंगिक हो और सभी क्षेत्रों में कार्य करता हो।
:प्रस्तावित नीति के कार्यान्वयन में सहायता के लिए राज्य स्तरीय अनुसंधान एवं विकास परिषद और फाउंडेशन की स्थापना की जाएगी। राज्य मंत्रिमंडल में चर्चा के बाद नीति को मंजूरी दी जाएगी।
:नीति का लक्ष्य राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का कम से कम 0.1% आरएंडडी और नवाचार को समर्पित करना हो सकता है, जिससे राज्य को और अधिक विकास करके लाभ होगा।
:नीति प्रस्ताव में उल्लिखित कुछ अतिरिक्त उपायों में प्रत्येक विभाग को अनुसंधान उद्देश्यों के लिए एक निश्चित बजटीय राशि देना शामिल है।


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